छत्तीसगढ़

एसईसीएल और हरदीबाजार ग्रामीणों की महाबैठक : 6 सूत्रीय मांगों पर प्रबंधन से सार्थक चर्चा, अब जमीन पर अमल का इंतजार

लाइव भारत 36 न्यूज़ मोहन चौहान संभाग रिपोर्टर

कोरबा: हरदी बाजार
कटघोरा विधायक की गरिमामय उपस्थिति और पाली एसडीएम की अध्यक्षता में एसईसीएल दीपका क्षेत्र के सभागार में ग्राम हरदीबाजार के भू-विस्थापितों के हितों को लेकर दिनांक 13/10/2026 को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक का आधिकारिक कार्यवृत्त (मिनट्स) एसईसीएल प्रबंधन की ओर से दिनांक 15/10/2026 को जारी किया गया है, जिसमें ग्रामीणों के 6 सूत्रीय मांग-पत्र पर हुए मंथन का पूरा ब्योरा सामने आया है।

आइए देखते हैं कि इस बैठक में ग्रामीणों की क्या-क्या 6 मुख्य मांगें थीं और एसईसीएल प्रबंधन की ओर से क्या आधिकारिक रुख और आश्वासन दिया गया है:

  1. मकानों और परिसंपत्तियों का 100% मुआवजा व सोलेशियम
    ग्रामीणों की मांग: हरदीबाजार के सभी मकानों और परिसंपत्तियों का शत-प्रतिशत मुआवजा और सोलेशियम के साथ भुगतान किया जाए। प्रबंधन का पक्ष: एसईसीएल ने स्पष्ट किया कि 26 अगस्त 2024 की कट-ऑफ तिथि के पहले बने मकानों को 100% सोलेशियम के साथ मुआवजा दिया जा रहा है। इसके बाद के मकानों के लिए बोर्ड ने 40% अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया) स्वीकार की है। वहीं, मानवीय दृष्टिकोण से प्रबंधन ने कहा कि यदि ग्राम सभा प्रस्ताव भेजती है, तो कट-ऑफ से 03.05.2025 (डीआरआरसी बैठक) तक बने मकानों के लिए अतिरिक्त 40% सोलेशियम का प्रस्ताव मुख्यालय भेजा जाएगा।
  2. ग्राम हरदीबाजार का संपूर्ण अधिग्रहण ग्रामीणों की मांग: भू-विस्थापितों के हित में ग्राम हरदीबाजार का पूर्ण अधिग्रहण किया जाए। प्रबंधन का पक्ष: प्रबंधन का कहना है कि पूर्व में अधिनियम के तहत कुल 133.325 हेक्टेयर और 189.985 हेक्टेयर भूमि का अर्जन कोयला भंडार व आवश्यकता के आधार पर किया जा चुका है। शेष क्षेत्र के संपूर्ण अधिग्रहण पर नियमानुसार और भविष्य की प्रोजेक्ट जरूरतों के हिसाब से विचार किया जाएगा।
  3. बसाहट स्थल परिवर्तन और ₹15 लाख की एकमुश्त राहत ग्रामीणों की मांग: जयंती नगर उतरदा के बजाय बायपास मार्ग उतरदा (खसरा नं. 1/1, 1/1क) को बसाहट के लिए व्यवस्थित किया जाए। प्रबंधन का पक्ष: राजस्व रिकॉर्ड में उक्त भूमि के ‘छोटे झाड़ के जंगल’ और ‘आरक्षित वन’ श्रेणी में होने के कारण सीधे आवंटन को नियमविरुद्ध बताया गया है। हालांकि, राहत देते हुए कहा गया कि यदि ग्राम सभा प्रस्ताव देती है, तो तृतीय अवार्ड की तिथि से 6 माह के भीतर विस्थापित होने वाले पात्र हितग्राहियों को अतिरिक्त समय दिया जा सकता है और ₹15 लाख की एकमुश्त राशि का प्रावधान है।
  4. वर्ष 2004 व 2010 की नीति के तहत स्थायी रोजगार ग्रामीणों की मांग: प्रभावित प्रत्येक खाताधारक परिवार को एसईसीएल में स्थायी रोजगार दिया जाए। प्रबंधन का पक्ष: कोल इंडिया आरएंडआर पॉलिसी 2012 और एसईसीएल की मॉडलिटीज के अनुसार प्रत्येक 2 एकड़ पर 1 रोजगार का फार्मूला तय है। अपात्र को ₹10 लाख प्रति एकड़ (न्यूनतम ₹2.50 लाख) या पात्र को रोजगार के बदले ₹20 लाख एकमुश्त का प्रावधान है। साथ ही, प्रत्येक खाताधारक को रोजगार देने का यह मामला फिलहाल माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए कंपनी कोर्ट के अंतिम आदेश का पालन करने के लिए बाध्य है।
  5. वर्ष 2004 और 2010 के बाद के बैनामा व नामांतरण पर मुआवजा ग्रामीणों की मांग: अधिग्रहण के पश्चात पंजीकृत बैनामा के जरिए खरीदी गई भूमि और नामांतरण वाले स्वामियों को भी मुआवजा व सोलेशियम मिले। प्रबंधन का पक्ष: नियमानुसार धारा 9(1) के तहत भूमि सरकार में निहित होने के बाद क्रय-विक्रय मान्य नहीं होता। फिर भी, ग्रामीणों द्वारा उच्च न्यायालय के जो आदेश प्रस्तुत किए गए हैं, उनका अध्ययन कर आगामी 10 दिनों के भीतर इस पर स्थिति स्पष्ट करने का भरोसा दिया गया है।
  6. पत्रक 5-6 और मुआवजा पत्रक A1 का प्रकाशन ग्रामीणों की मांग: पारदर्शिता के लिए इन दस्तावेजों का समाचार पत्रों में प्रकाशन हो। प्रबंधन का पक्ष: दस्तावेजों के विशाल आकार के कारण अखबारों में प्रकाशन का नियम न होने की बात कही गई। हालांकि, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए 14/10/2026 तक पत्रक 5-6 की प्रति ग्राम सरपंच को पुनः उपलब्ध कराने का पूर्ण आश्वासन दिया गया।

यह बैठक बेहद सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई है, जहां अंत में उपसरपंच द्वारा माता-पिता एवं पुत्रवधू को भी सोलेशियम के दायरे में लाने की मांग रखी गई जिस पर उच्चधिकारियों से चर्चा की बात कही गई। अब देखने वाली asli baat (असली बात) यह होगी कि एसईसीएल प्रबंधन और ग्रामीण इन सारी बातों और आश्वासनों को जमीन पर कितनी तेजी और ईमानदारी से लागू करते हैं, जिससे गांव वालों को इसका सच्चा लाभ मिल सके।

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