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आलेख: ‘काकरोच जनता पार्टी’ नेस्तनाबूत होने के कगार पर आस्तीन के साँपों के फन कुचलना ज़रूरी



विशेष विश्लेषण — अधिवक्ता चितरंजय पटेल
शक्ति: देश की व्यवस्था को चुनौती देने और युवाओं के नाम पर भ्रम फैलाने वाली ‘काकरोच जनता पार्टी’ (CJP) अब पूरी तरह से नेस्तनाबूत होने के कगार पर पहुँच चुकी है। जब तक इन ‘काकरोचों’ को चीनी (विदेशी या संदिग्ध फंडिंग) मिलती रही, तब तक ये सोशल मीडिया के गटर से निकलकर खूब फलते-फूलते रहे। लेकिन जैसे ही मोदी-योगी सरकार की तरफ से चीनी के बजाय कानून का सख्त ‘सोडा’ (डंडा) मिलने लगा, ये तिलचट्टे की मानिंद अपनी जान बचाकर यहाँ-वहाँ उड़कर भागने लगे हैं। केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार इन देशविरोधी तत्वों को उड़ने से पहले ही कानून का कड़ा सोडा खिलाकर पूरी तरह से ठीक करने में जुट गई है।
अब सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन तिलचट्टों को पीछे से फंडिंग देने वाले और चीनी खिलाने वाले सफेदपोश हाथों की गहन जांच शुरू हो चुकी है। जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता देख अब इनके असली आका ही इन्हें छुपाने और देश से भगाने की जुगत में लग गए हैं, ताकि इन छोटे मोहरों (तिलचट्टों) के साथ-साथ कहीं उनकी अपनी राजनीतिक बलि न चढ़ जाए।
कानून की सख्ती का आलम यह है कि इस तथाकथित आंदोलन की हवा पूरी तरह निकल चुकी है। ‘निशु’ की हालत खराब है, ‘बोरा’ को पुलिस लगातार दौड़ा रही है, और ‘राठी’ पुलिस की लाठी के खौफ से मिमियाने लगा है। वहीं, इस पूरी साज़िश के मुख्य सूत्रधार अभिजीत दीपके की बत्ती अब पूरी तरह गुल हो चुकी है। जब उसे उसके आकाओं ने ऐन वक्त पर अंधेरे में छोड़ दिया और पहचानने से ही इनकार कर दिया, तब वह डर के मारे विदेश (अमेरिका) भागने की फिराक में था।
लेकिन वह भूल गया कि देश के ‘शहंशाह’ (अमित शाह) की बादशाहत की सीमा में आना तो बेहद सहज है, लेकिन देश की सीमाओं को लांघकर बाहर भागने के लिए शहंशाह की इजाजत जरूरी होती है। यही चूक इस ‘तिलचट्टे सरदार’ को अब भारी पड़ गई है। कानून और दिल्ली पुलिस की जांच का शिकंजा उसे घुटने टेकने पर मजबूर कर ही देगा। अब अपनी चमड़ी बचाने के लिए उसे अपने असली आकाओं और पर्दे के पीछे बैठे फंडिंग मैनेजरों के नाम शहंशाह के सामने उगलने ही होंगे। इस चक्रव्यूह से दीपके एंड कंपनी का निकलना अब नामुमकिन है।
यह महान भारत देश है, जहाँ देश के खिलाफ रची गई हर बड़ी से बड़ी साज़िश हमेशा नेस्तनाबूत हुई है। हालांकि, देश की जनता को अभी भी बेहद सावधान और सतर्क रहने की आवश्यकता है। आज इन काकरोचों का उत्पात तो सरकार की नीम और नमक की मार से शांत हो ही रहा है, लेकिन अभी भी सिस्टम की आस्तीन में छुपे उन बड़े ‘फनकारों’ (साँपों) को चिन्हित करना बाकी है जो इन्हें सह देते हैं। जब तक इन आस्तीन के साँपों के फन पूरी तरह से नहीं कुचले जाते, तब तक राष्ट्र पूरी तरह सुरक्षित नहीं होगा। इन देशद्रोहियों के सफाए के बाद ही देश पूर्ण शांति और समृद्धि की राह पर आगे बढ़ेगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘मिशन 2047: विकसित भारत’ का सपना साकार होगा।

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