
संवाददाता मोहन चौहान लाइव भारत 36 न्यूज़
कोरबा/रलिया। चक्रवात के प्रभाव और बारिश के बीच जहां लोगों को सुरक्षित रहने की सलाह दी जा रही है, वहीं ग्राम पंचायत रलिया के SECL गेवरा परियोजना प्रभावित परिवारों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनके घर तोड़ दिए गए, लेकिन अब तक मुआवजे की राशि नहीं मिली। समय पर मुआवजा मिल जाता तो वे अपने परिवारों के लिए रहने की व्यवस्था कर सकते थे। इसी परेशानी के बीच ग्रामीणों का आक्रोश खदान में देखने को मिला, जहां महिलाएं अपने बच्चों को लेकर उतर गईं और सावेल मशीन बंद करा दी।

ग्रामीणों के मुताबिक, घर टूटने के बाद उनके सामने परिवार को सुरक्षित रखने और रहने की व्यवस्था करने की गंभीर समस्या है। बारिश के मौसम में यह परेशानी और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मुआवजे का भुगतान समय पर कर दिया जाता, तो वे अपने लिए नया आशियाना बना सकते थे। अब सवाल यह है कि जब परिवारों के पास रहने की उचित व्यवस्था नहीं है, तो वे खराब मौसम के बीच अपने बच्चों को सुरक्षित कहां रखें?

मुआवजे और अपनी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर ग्रामीण खदान में उतर गए। महिलाओं ने अपने बच्चों के साथ पहुंचकर सावेल मशीन बंद करा दी। इस दौरान गांव के बुजुर्ग, युवा, बच्चे और अन्य ग्रामीण भी मौजूद रहे। घटना ने प्रभावित परिवारों की परेशानी को एक बार फिर सामने ला दिया है।
ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए अब SECL गेवरा परियोजना प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। प्रभावित परिवारों के मुआवजे का भुगतान कब होगा? जिन लोगों के घर तोड़े जा चुके हैं, उनके पुनर्वास और सुरक्षित आवास को लेकर क्या व्यवस्था की गई है? क्या प्रबंधन बारिश के बीच इन परिवारों की परेशानी को देखते हुए जल्द राहत दिलाएगा?
ग्रामीणों की मांग है कि उनके मुआवजे से जुड़े मामलों का नियमानुसार जल्द निराकरण किया जाए, ताकि वे अपने परिवारों के लिए सुरक्षित रहने की व्यवस्था कर सकें। अब संबंधित अधिकारियों की पहल और प्रबंधन के जवाब का इंतजार है।
घर केवल ईंट और दीवारों का ढांचा नहीं, बल्कि एक परिवार की जिंदगी और सुरक्षा का आधार होता है। ऐसे में प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समय पर समाधान होना जरूरी है।




