छत्तीसगढ़

कुरदा में साइबर जागरूकता शिविर आयोजित, विद्यार्थियों को ऑनलाइन ठगी से बचने के बताए उपाय

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर न डरें, किसी से साझा न करें ओटीपी

सक्ती // राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के आदेशानुसार तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जांजगीर-चांपा के निर्देश और मार्गदर्शन में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुरदा में साइबर जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में छात्र-छात्राओं को वर्तमान समय में बढ़ते साइबर अपराधों, ऑनलाइन ठगी के नए तरीकों तथा उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।

शिविर में बताया गया कि साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। थोड़ी-सी सावधानी बरतकर आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी से बचा जा सकता है। विद्यार्थियों को फिशिंग और स्पूफिंग जैसे साइबर अपराधों के बारे में बताते हुए समझाया गया कि ठग बैंक, सरकारी विभाग या प्रतिष्ठित कंपनियों का अधिकारी बनकर फर्जी ईमेल, संदेश और फोन कॉल करते हैं। इसके माध्यम से वे लोगों को संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने के लिए प्रेरित करते हैं या निजी जानकारी हासिल कर बैंक खातों से पैसे निकाल लेते हैं।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराकर करते हैं ठगी

शिविर में डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों के प्रति विशेष रूप से जागरूक किया गया। बताया गया कि साइबर ठग स्वयं को पुलिस, सीबीआई या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते हैं। वे मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स या अन्य गंभीर अपराधों में संलिप्त होने का झूठा आरोप लगाकर डर पैदा करते हैं और गिरफ्तारी का भय दिखाकर पैसों की मांग करते हैं। विद्यार्थियों को समझाया गया कि ऐसे फोन कॉल से घबराने के बजाय सतर्क रहें और किसी भी अनजान व्यक्ति को पैसे न भेजें।

इसके अलावा फर्जी नौकरी और लॉटरी के प्रलोभन, क्रेडिट एवं डेबिट कार्ड के दुरुपयोग, कस्टमर केयर के नाम पर होने वाली ठगी तथा कम समय में अधिक मुनाफा देने वाली फर्जी निवेश योजनाओं से बचने की सलाह दी गई। साइबर ठगों द्वारा भरोसेमंद व्यक्ति बनकर पासवर्ड, पिन और अन्य गोपनीय जानकारी हासिल करने के तरीकों के बारे में भी बताया गया।

शिविर में यह भी समझाया गया कि गूगल पर मिले किसी अनजान कस्टमर केयर नंबर पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने, एपीके फाइल इंस्टॉल करने और अनजान व्यक्तियों को मोबाइल का रिमोट एक्सेस देने से बचें। सिम कार्ड से जुड़ी धोखाधड़ी के प्रति भी सतर्क रहने की आवश्यकता बताई गई।

साइबर ठगी से बचने के लिए अपनाएं सावधानी

विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी, एटीएम पिन या पासवर्ड साझा न करें। संदिग्ध लिंक, ईमेल और मैसेज पर क्लिक करने से बचें। अपने सभी ऑनलाइन खातों के लिए अलग-अलग और मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें तथा जहां संभव हो, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण (टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) सक्रिय रखें।

मोबाइल का सॉफ्टवेयर समय-समय पर अपडेट करने, ऐप केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से डाउनलोड करने और सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग करते समय बैंकिंग या अन्य संवेदनशील लेन-देन से बचने की सलाह दी गई। अचानक धनवान बनाने या बड़ा इनाम जीतने का लालच देने वाले फोन कॉल और संदेशों से भी सावधान रहने को कहा गया।

ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें शिकायत

शिविर में बताया गया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे बिना देर किए साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने, संबंधित बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को तत्काल सूचना देने तथा आवश्यकता पड़ने पर नजदीकी पुलिस थाना या साइबर सेल में शिकायत करने की सलाह दी गई।

शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग करने के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें साइबर अपराधों से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान करना रहा।

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