दो हफ्ते से तेंदुए का खौफ, वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल; ग्रामीण बोले— अनहोनी से पहले जागे प्रशासन

कलारा के जंगलों में लगातार दिख रहा तेंदुआ, शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप; ग्रामीणों में दहशत, नियमित कांबिंग और गश्त की मांग।
रिपोर्टर विनय पटेल
बैरसिया विधान सभा के ग्राम कलारा वन क्षेत्र में पिछले दो सप्ताह से तेंदुए की लगातार मौजूदगी की खबरों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। गुनगा-कलारा और उनीदा-कलारा मार्ग पर कई लोगों द्वारा तेंदुए के देखे जाने के दावे किए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद वन विभाग ने केवल औपचारिक कार्रवाई की है, जबकि प्रभावित क्षेत्र में सघन कांबिंग अभियान चलाकर तेंदुए की तलाश की जानी चाहिए थी।
गांव के सरपंच देवकरण कुशवाह (गुड्डू) एवं जनपद सदस्य प्रतिनिधि घनश्याम शर्मा ने बताया कि तेंदुए की सूचना नाकेदार पंकज कुमार रावत, डिप्टी नरेंद्र पटेल, वन परिक्षेत्र अधिकारी संजय सिंह राजपूत तथा सीसीएफ भोपाल को कई बार दी जा चुकी है। इसके बावजूद अभी तक ऐसा कोई प्रभावी अभियान नजर नहीं आया, जिससे ग्रामीणों का भय दूर हो सके।
तेंदुए की लगातार मूवमेंट से कलारा सहित आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। लोग शाम ढलते ही घरों से निकलने से बच रहे हैं। किसानों में खेतों पर जाने और पशुपालकों में मवेशियों को चराने को लेकर डर बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो किसी भी समय जन-धन की हानि हो सकती है।
ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि पूरे क्षेत्र में तत्काल सघन कांबिंग अभियान चलाया जाए, नियमित गश्त बढ़ाई जाए और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ टीम की मदद से तेंदुए को सुरक्षित रेस्क्यू कर आबादी वाले क्षेत्र से दूर किया जाए। उनका कहना है कि जनसुरक्षा से जुड़े इस मामले में केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है।

जनहित का सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण जितना जरूरी है, उतनी ही महत्वपूर्ण आम नागरिकों की सुरक्षा भी है। लोगों का मानना है कि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो कोई बड़ी अनहोनी होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में वन विभाग को स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए।




