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किसानों की 33 मांगों पर मुख्यमंत्री ने दिया भरोसा, MSP से लेकर बिजली-सिंचाई तक उठे मुद्दे

भारतीय किसान संघ ने मुख्यमंत्री को सौंपा व्यापक मांग-पत्र; फसल खरीदी, आवारा पशुओं से सुरक्षा, राजस्व प्रक्रिया में सुधार और भूमि अधिग्रहण पर रखे अहम सुझाव
रिपोर्टर विनय पटेल
बैरसिया।।प्रदेश के किसानों की समस्याओं को लेकर भारतीय किसान संघ ने सरकार के सामने किसानों के हितों से जुड़ी 33 प्रमुख मांगें रखी हैं। मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित किसान मंच की बैठक में संघ के पदाधिकारियों ने कृषि, सिंचाई, बिजली, राजस्व, मंडी व्यवस्था और भूमि अधिग्रहण सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की और मुख्यमंत्री को मांग-पत्र सौंपा। मुख्यमंत्री ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके निराकरण के लिए सकारात्मक पहल करने का आश्वासन दिया।
बैठक में किसानों की सबसे बड़ी चिंता फसलों के उचित दाम और समय पर खरीदी को लेकर सामने आई। भारतीय किसान संघ ने मांग की कि गेहूं, चना, सरसों और मक्का सहित सभी प्रमुख फसलों की समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी की तैयारी पहले से की जाए, ताकि किसानों को उपज बेचने के लिए परेशान न होना पड़े। इसके साथ ही सिंघाड़े की खेती के लिए भी उचित मूल्य निर्धारण की मांग उठाई गई।

जंगली जानवरों से फसल बचाने की मांग

किसानों ने नीलगाय (घोड़ा रोज), जंगली सूअर, हिरण और वानरों सहित अन्य वन्यजीवों से फसलों को होने वाले नुकसान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। संघ ने मांग की कि प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले वन्यजीवों के प्रबंधन के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। वहीं, गोपालकों को भी गौशालाओं की तर्ज पर गायों के पालन के लिए आर्थिक अनुदान देने की मांग रखी गई।

मंडियों में सुविधाएं बढ़ें, तौल में न हो गड़बड़ी

मंडी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए मंडी अधिनियम का सख्ती से पालन कराने, मंडियों में गुणवत्ता जांच की डॉकोज (Dokoz) टेस्टिंग मशीनें लगाने और 10 टन क्षमता के तौल कांटे स्थापित करने की मांग की गई। संघ का कहना है कि मंडियों में किसानों को उपज की सही तौल और गुणवत्ता के आधार पर उचित मूल्य मिलना चाहिए।

नामांतरण और बंटवारे के लिए तय हो समय-सीमा

राजस्व विभाग की प्रक्रियाओं में किसानों को होने वाली परेशानी भी बैठक में उठाई गई। अविवादित नामांतरण, बंटवारे और सीमांकन के लिए निश्चित समय-सीमा तय करने तथा लापरवाही पर जवाबदेही निर्धारित करने की मांग की गई। नामांतरण के लिए पांच-छह साल पुराने रिकॉर्ड मांगने की प्रक्रिया बंद करने और राजस्थान की तर्ज पर अविवादित मामलों में 1000 रुपए के स्टांप पर हक त्याग को मान्यता देने का सुझाव भी दिया गया।

बिजली संकट और ट्रांसफार्मर की समस्या पर भी जोर

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती, ओवरलोड ट्रांसफार्मर और जर्जर तारों की समस्या को प्रमुखता से उठाया गया। संघ ने ओवरलोड ट्रांसफार्मरों का भार कम करने, पुराने बिजली तार बदलने और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि ट्रांसफार्मर योजना को तत्काल प्रभाव से शुरू करने की मांग भी रखी।
अधूरी सिंचाई परियोजनाओं का काम पूरा हो
किसानों ने कहा कि सिंचाई परियोजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब नहरों का पानी खेतों के अंतिम छोर तक पहुंचे। इसके लिए बिजलवाड़ा सिंचाई परियोजना (बड़वानी-खरगोन), ओंकारेश्वर चतुर्थ चरण, कुंडालिया सिंचाई परियोजना (आगर) तथा मोरंड-जंजाल सहित अन्य अधूरी नहर परियोजनाओं को पूरा कर टेल तक पानी पहुंचाने की मांग की गई।

जमीन अधिग्रहण में किसानों की सहमति जरूरी

भूमि अधिग्रहण और विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली पर भी संघ ने सवाल उठाए। विकास प्राधिकरणों को भंग करने तथा लैंड पुलिंग के बजाय राष्ट्रीय हित की परियोजनाओं के लिए किसानों की सहमति से बाजार दर पर भूमि अधिग्रहण करने की मांग की गई। संघ का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर किसानों के हितों और उनके भूमि अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

कृषि उपकरणों से GST हटाने सहित अन्य मांगें

बैठक में कृषि उपकरणों पर जीएसटी समाप्त करने, पराली प्रबंधन की ठोस व्यवस्था बनाने, किसानों को समय पर पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने, खेत सड़क योजना दोबारा शुरू करने और डिफाल्टर किसानों को नियमित करने जैसे मुद्दे भी उठाए गए। इसके अलावा प्रदेश में ‘पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नोलॉजी एवं मैनेजमेंट’ का शिक्षण संस्थान स्थापित करने की मांग रखी गई, जिससे फसल कटाई के बाद उपज के भंडारण, प्रसंस्करण और प्रबंधन की आधुनिक तकनीक किसानों तक पहुंच सके।

किसान संघ के पदाधिकारी रहे मौजूद

किसान मंच की बैठक में भारतीय एग्रो इकोनॉमिक रिसर्च सेंटर के अखिल भारतीय अध्यक्ष प्रमोद चौधरी, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राघवेन्द्र सिंह पटेल, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य गिरिजा ठाकुर, मध्य क्षेत्र संगठन मंत्री महेश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना, प्रदेश महामंत्री चंद्रकांत गौर, मध्यभारत प्रांत संगठन मंत्री भरत पटेल, महाकौशल प्रांत संगठन मंत्री तुलाराम, प्रांत महामंत्री प्रहलाद पटेल, मालवा प्रांत संगठन मंत्री अतुल माहेश्वरी सहित दिनेश शर्मा, लक्ष्मीनारायण पटेल, रमेश दांगी, राजेंद्र, शिवनंदन रघुवंशी, जगराम यादव, सर्वज्ञ दीवान, नमो नारायण दीक्षित, नवनीत रघुवंशी, आरसी पटेल, ओम नारायण पचौरी सहित अन्य प्रदेश पदाधिकारी उपस्थित रहे।
अब निगाहें मांगों पर अमल पर: भारतीय किसान संघ ने किसानों से जुड़े इन मुद्दों को सरकार के समक्ष प्रमुखता से रखा है। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद किसानों को उम्मीद है कि इन मांगों पर शासन स्तर पर ठोस निर्णय होंगे और उनका लाभ सीधे खेतों तक पहुंचेगा।

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