नवरात्रि सामाजिक जागरूकता और एकता की दृष्टि से अद्भुत परंपरा… अधिवक्ता चितरंजय

लाइव भारत 36न्यूज़ से जिला रिपोर्टर
शक्ति। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर समूचे क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का माहौल है। अश्विन शुक्ल प्रतिपदा के शुभ मुहूर्त पर मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप, मां शैलपुत्री की विशेष पूजा- अर्चना के साथ नौ दिवसीय नवरात्र पर्व का भव्य शुभारंभ हो गया है। इस पावन अवसर पर बिलासपुर उच्च न्यायालय व शक्ति के वरिष्ठ अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने क्षेत्रवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के इस अनुपम दृश्य को सामाजिक जागरूकता और एकता की दृष्टि से एक अद्भुत परंपरा बताया। उन्होंने कहा, “जब पालनहार भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी से विश्राम अवस्था में हैं, तब इस चातुर्मास की अवधि में हम सभी निरंतर भगवान शिव और उनके परिवार की साधना में लीन हैं। सावन मास में भोलेनाथ के जलाभिषेक और भाद्रपद में उनके पुत्र विघ्नहर्ता श्री गणेश की आराधना के बाद, अब जगत जननी मां जगदम्बा भवानी के पूजन का यह महापर्व हमारे जीवन को नई ऊर्जा और एकता से भर रहा है।”
धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री नवदुर्गा में प्रथम देवी हैं। संस्कृत में ‘शैल’ का अर्थ पर्वत और ‘पुत्री’ का अर्थ बेटी होता है। पर्वतराज हिमालय और माता मैनावती के यहाँ जन्म लेने के कारण इन्हें ‘शैलपुत्री’, ‘पार्वती’ और ‘हेमवती’ जैसे नामों से जाना जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां शैलपुत्री अपने पूर्व जन्म में प्रजापति दक्ष की पुत्री ‘सती’ थीं। उनका विवाह भगवान शिव से हुआ था। एक बार राजा दक्ष द्वारा आयोजित महायज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किए जाने और वहां जाने पर हुए घोर अपमान को सहन न कर पाने के कारण माता सती ने यज्ञ की पवित्र अग्नि में आत्मदाह कर दिया था। अगले जन्म में उन्होंने हिमालय राज के यहाँ जन्म लिया और कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पुनः पति के रूप में प्राप्त किया।
शास्त्रों के अनुसार, मां शैलपुत्री का स्वरूप अत्यंत भव्य और कल्याणकारी है, तथा माता रानी वृषभ (बैल) पर सवार हैं, जिसके कारण उन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है। साथ ही उनके दाहिने हाथ में भगवान शिव का प्रतीक ‘त्रिशूल’ और बाएं हाथ में शांति व पवित्रता का सूचक ‘कमल का फूल’ सुशोभित है।
आज प्रथम दिन पर माता शैलपुत्री के चरणों में शीश नवाकर भक्तों ने सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना की। पूरे क्षेत्र के देवी मंदिरों और पूजा पंडालों में सुबह से ही घटस्थापना (कलश स्थापना) के साथ माता के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है।




