छत्तीसगढ़

संगठन समीक्षा संवाद एवं संकल्प अधिवेशन में वेतन विसंगति दूर करने व टेट अनिवार्यता की रणनीति पर मंथन


सारंगढ़। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रवींन्द्र राठौर एवं टीम के नेतृत्व में संगठन की मजबूती, अनुशासन, सोशल मीडिया की भूमिका एवं संगठन के गठन के मूल उद्देश्य को लेकर “संगठन समीक्षा संवाद एवं संकल्प अधिवेशन” का आयोजन शिवरीनारायण में किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश एवं जिला पदाधिकारियों के साथ विभिन्न ब्लॉकों के अध्यक्ष शामिल हुए।
अधिवेशन का मुख्य उद्देश्य संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करना, पदाधिकारियों एवं सदस्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा संगठन के मूल उद्देश्यों और लंबित मांगों को लेकर नई रणनीति तैयार करना रहा। इस दौरान संगठन की कार्यप्रणाली, अनुशासन, सोशल मीडिया के माध्यम से संगठन की गतिविधियों को मजबूती देने तथा संगठन आखिर क्यों बनाया गया, इन महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से संवाद किया गया।
वेतन विसंगति संगठन की सबसे बड़ी मांग
बैठक में सहायक शिक्षकों की वर्षों पुरानी वेतन विसंगति को प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया गया। पदाधिकारियों ने कहा कि सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर करने के उद्देश्य से ही संगठन का गठन हुआ और लाखों शिक्षक संगठन से जुड़े, लेकिन संगठन के गठन के लगभग आठ वर्ष बीत जाने के बाद भी यह मांग पूरी तरह निराकृत नहीं हो सकी है।
पदाधिकारियों ने कहा कि इस विषय पर अब सभी को एकजुट होकर ठोस रणनीति के साथ शासन के समक्ष अपना प्रस्ताव रखना होगा। मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री द्वारा भी संगठन से वेतन विसंगति को लेकर अपना प्रस्ताव प्रस्तुत करने की बात कही गई है। ऐसे में संगठन द्वारा व्यापक विचार-विमर्श के बाद व्यवहारिक एवं स्वीकार्य प्रस्ताव तैयार करने पर जोर दिया गया।
वन टाइम रिलेक्सेशन से समाधान का प्रस्ताव
जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के जिलाध्यक्ष संकीर्तन नंद ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सहायक शिक्षकों की वर्षो पुरानी वेतन विसंगति आज भी संगठन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि संगठन की एकजुटता के कारण अनेक साथियों को पदोन्नति मिली और कई साथी प्रधान पाठक एवं शिक्षक के पद पर पहुंचे। यह संगठन की एकता और संघर्ष की बड़ी उपलब्धि है, लेकिन जिस मूल मांग को लेकर संगठन का निर्माण हुआ था, वह आज भी लंबित है।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि संगठन एक बार फिर अपनी एकजुटता का परिचय देते हुए बचे हुए सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर कराने के लिए प्रभावी पहल करे। इसके लिए वन टाइम रिलेक्सेशन का प्रस्ताव शासन के समक्ष रखा जा सकता है। पूर्व में तीन वर्ष की सेवा के आधार पर क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ दिए जाने की तर्ज पर अब पांच वर्ष का वन टाइम रिलेक्सेशन देकर शेष सहायक शिक्षकों को क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ देने का रास्ता निकाला जा सकता है। इससे वर्षों से लंबित वेतन विसंगति के समाधान की दिशा में ठोस पहल संभव हो सकती है।
सेवा सुरक्षा एवं विभागीय परीक्षा पर भी हुई चर्चा
अधिवेशन में सहायक शिक्षकों की दूसरी महत्वपूर्ण मांग सेवा सुरक्षा को लेकर भी चर्चा हुई। प्रदेश अध्यक्ष रवींन्द्र राठौर ने बताया ने कि इस संबंध में शासन स्तर पर वार्ता हो चुकी है तथा जल्द ही नोटिफिकेशन जारी किए जाने की बात कही गई है।
जिलाध्यक्ष संकीर्तन नंद ने सुझाव दिया कि सेवा सुरक्षा के प्रावधान में विभागीय परीक्षा का स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में सेवा सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो तथा आगे पदोन्नति का रास्ता भी स्पष्ट एवं सुगम बना रहे।
अधिवेशन में पदाधिकारियों ने संगठन को केवल मांगों तक सीमित न रखते हुए जमीनी स्तर पर मजबूत, अनुशासित और सक्रिय संगठन बनाने का संकल्प लिया। साथ ही ब्लॉक स्तर पर नियमित संवाद एवं सांगठनिक गतिविधियों के माध्यम से प्रत्येक सदस्य को संगठन से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।
कार्यक्रम में जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ से प्रदेश महामंत्री मनीष डडसेना, प्रदेश संयुक्त सचिव बुधनी अजय, जिलाध्यक्ष संकीर्तन नंद,कार्यकारी जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश भारद्वाज, जिला सचिव सूरज कुमार सारथी, वरिष्ठ सलाहकार संजय मिश्रा, ब्लॉक अध्यक्ष सतीश चौहान, ब्लॉक अध्यक्ष पवन पटेल एवं ब्लॉक अध्यक्ष सरयूकांत बंजारे सहित पदाधिकारी एवं संगठन के सदस्य उपस्थित रहे।
अधिवेशन का मूल संदेश यही रहा कि संगठन की ताकत उसकी एकता, अनुशासन और साझा उद्देश्य में है, इसलिए लंबित मांगों के समाधान के लिए सभी पदाधिकारी एवं सदस्य एकजुट होकर आगे की रणनीति के साथ संघर्ष को मजबूत करेंगे

Related Articles