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बैरसिया में ‘जहर’ बनकर बह रहा नलों का पानी, पांच दिनों से दूषित जल पीने को मजबूर हजारों लोग

बारिश का हवाला देकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकता प्रशासन,

फिल्टर प्लांट की व्यवस्था सवालों के घेरे में; नागरिकों ने पुराने ट्यूबवेलों से तत्काल जलापूर्ति शुरू करने की उठाई मांग
रिपोर्टर विनय पटेल
बैरसिया नगर में पिछले पांच दिनों से नलों के माध्यम से अत्यंत गंदे, मटमैले और कीचड़युक्त पानी की सप्लाई की जा रही है। हालात ऐसे हैं कि हजारों नागरिक दूषित पानी का उपयोग करने को मजबूर हैं। बरसात के मौसम में इस तरह की लापरवाही से जलजनित बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है, लेकिन नगर पालिका प्रशासन अब तक स्थायी समाधान नहीं कर सका है।
नगर में विरही डैम से पेयजल की आपूर्ति की जाती है। लगातार बारिश के कारण डैम का पानी मटमैला हो गया है। वहीं नगर पालिका परिषद के फिल्टर प्लांट में भी कीचड़ जमा होने की बात सामने आ रही है, जिससे पानी का समुचित शुद्धिकरण नहीं हो पा रहा। नतीजतन पिछले पांच दिनों से पूरे नगर क्षेत्रों में गंदे पानी की सप्लाई लगातार जारी है।
इस संबंध में मुख्य नगर पालिका अधिकारी राजेन्द्र सक्सेना का कहना है कि बारिश के कारण यह स्थिति बनी है और इसे सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि पांच दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति में कोई खास सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि यदि हर वर्ष बरसात होती है, तो नगर की पेयजल व्यवस्था को इससे निपटने के लिए पहले से तैयार क्यों नहीं किया गया?
नगरवासियों का कहना है कि विरही डैम से जलापूर्ति शुरू होने के बाद पुराने ट्यूबवेल बोरों को बंद कर दिया गया, जबकि उनमें पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी उपलब्ध है। लोगों का कहना है कि जब तक डैम का पानी पूरी तरह साफ नहीं हो जाता, तब तक पुराने ट्यूबवेलों को तत्काल चालू कर नगरवासियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
नगर के नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं कराया गया और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो दूषित पानी के कारण बीमारियां फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जलापूर्ति व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाए, फिल्टर प्लांट की प्रभावी सफाई कराई जाए और लोगों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए।
जनता का सवाल: आखिर कब तक बैरसिया के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर रहेंगे? क्या प्रशासन किसी बड़ी स्वास्थ्य समस्या का इंतजार कर रहा है, या फिर समय रहते ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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