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एक माह तक चला ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान सम्पन्न

साइबर मेले में छात्राओं ने दिखाई जागरूकता और प्रतिभा, डीआईजी राजेश कुमार चंदेल ने किया समापन
रिपोर्टर विनय पटेल
बैरसिया। डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति आमजन, विशेषकर विद्यार्थियों को जागरूक करने के उद्देश्य से थाना बैरसिया द्वारा 8 जून से प्रारंभ किया गया ‘सेफ क्लिक 2.0’ साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान मंगलवार को एक माह की सफल यात्रा पूरी करते हुए सांदीपनि स्कूल के सभागार में संपन्न हुआ। समापन कार्यक्रम में डीआईजी राजेश कुमार चंदेल एवं एसपी देहात पंकज कुमार पांडेय मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
एक माह तक चले इस अभियान के दौरान विद्यालयों, महाविद्यालयों और विभिन्न सामाजिक माध्यमों से लोगों को साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक किया गया। समापन अवसर पर पीएम श्री शासकीय सरोजनी नायडू कन्या उमावि की छात्राओं के लिए साइबर क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए साइबर सुरक्षा से जुड़े प्रश्नों के सटीक उत्तर दिए। छात्राओं ने रंगोली, पोस्टर और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक, ओटीपी फ्रॉड, क्यूआर कोड स्कैम और सोशल मीडिया अपराधों से बचने का प्रभावशाली संदेश भी दिया।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को थाना बैरसिया की ओर से प्रमाण-पत्र एवं आकर्षक उपहार देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डीआईजी राजेश कुमार चंदेल ने कहा कि इंटरनेट का उपयोग जितनी समझदारी से किया जाएगा, उतना ही समाज साइबर अपराधों से सुरक्षित रहेगा। उन्होंने छात्राओं को डिजिटल दुनिया में सतर्क रहने और किसी भी अनजान लिंक या संदिग्ध कॉल से बचने की सलाह दी।
कार्यक्रम के अंत में एसडीओपी वैशाली करहलिया ने उपस्थित छात्राओं एवं विद्यालय स्टाफ को साइबर सुरक्षा के प्रति सजग एवं जिम्मेदार नागरिक बनने की शपथ दिलाई। वहीं एसपी देहात पंकज कुमार पांडेय ने कहा कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी या संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की जानकारी तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें और अपने परिवार तथा समाज को भी जागरूक करें।
कार्यक्रम में एसडीओपी मंजू चौहान, थाना प्रभारी वीरेंद्र कुमार सेन, गुनगा थाना प्रभारी रिंकू जाटव, थाना स्टाफ एवं विद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ शिक्षक दिनेश कुमार शुक्ला ने किया तथा आभार प्राचार्य गीता जोशी ने व्यक्त किया।
एक माह तक चले इस अभियान ने यह संदेश दिया कि साइबर सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। जागरूकता ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।

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