कोरबा

मुस्कान को न्याय दिलाने की मांग तेज, 14 वर्षीय मासूम की मौत पर उठे गंभीर सवाल

संवाददाता मोहन चौहान लाइव भारत 36 न्यूज़

कोरबा,  हरदी बाजार क्षेत्र की 14 वर्षीय नाबालिग मुस्कान चौहान की आत्महत्या का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। मासूम की मौत के बाद उसके परिवार ने सोशल मीडिया पर फोटो वायरल कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया है। वहीं, सर्व पत्रकार एकता महासंघ छत्तीसगढ़ ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए पुलिस अधीक्षक कोरबा से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

परिवार का आरोप है कि मुस्कान और उसके माता-पिता ने घटना से पहले 21 और 22 जुलाई 2026 को थाना हरदी बाजार पहुंचकर शिकायत करने का प्रयास किया था, लेकिन उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इसके दो दिन बाद, 24 जुलाई 2026 को मुस्कान ने आत्महत्या कर ली।

मासूम की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या समय रहते उसकी शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई की जाती तो शायद मुस्कान आज जिंदा होती?

पीड़ित परिवार के अनुसार, मुस्कान को सोशल मीडिया के माध्यम से कथित रूप से परेशान किया जा रहा था और उसकी तस्वीरें वायरल की गई थीं। परिवार का कहना है कि लगातार मानसिक दबाव और प्रताड़ना से मुस्कान बेहद परेशान थी।

महासंघ ने पुलिस अधीक्षक को दिए अपने आवेदन में इस पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच कराने और यह पता लगाने की मांग की है कि मुस्कान को किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा तथा उसकी मौत से पहले उसके साथ क्या-क्या हुआ था।

इस मामले में थाना हरदी बाजार पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। परिवार का आरोप है कि 21 और 22 जुलाई को थाना पहुंचने के बावजूद उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया।

यदि यह आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह बेहद गंभीर मामला होगा। आखिर एक नाबालिग बच्ची और उसके माता-पिता मदद की उम्मीद लेकर पुलिस के पास पहुंचे थे, तो उनकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई? शिकायत दर्ज हुई या नहीं? उस समय थाने में कौन-कौन अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे? इन सभी सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से सामने आना चाहिए।

महासंघ ने मांग की है कि उस समय की थाने की CCTV फुटेज, रोजनामचा, शिकायत संबंधी रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित कर जांच में शामिल किया जाए।

मुस्कान की मौत के पीछे वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए उसके और संबंधित आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच, सोशल मीडिया गतिविधियों का तकनीकी विश्लेषण तथा उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की गई है।

महासंघ का कहना है कि इस मामले में कोई भी डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकता है। इसलिए किसी भी मोबाइल, चैट, फोटो, वीडियो या सोशल मीडिया गतिविधि को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

सर्व पत्रकार एकता महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष प्रमोद कुमार बंजारे के नेतृत्व में महासंघ की टीम ने पुलिस अधीक्षक कोरबा को पत्र सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

  • मुस्कान की मौत के पीछे की पूरी परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच हो।
  • परिवार द्वारा लगाए गए प्रताड़ना के आरोपों की गंभीरता से जांच की जाए।
  • सोशल मीडिया पर फोटो वायरल करने के आरोपों की तकनीकी जांच हो।
  • मोबाइल, चैट, फोटो, वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित किया जाए।
  • घटना से पहले थाना हरदी बाजार में परिवार द्वारा की गई शिकायत के संबंध में रिकॉर्ड और CCTV की जांच हो।
  • यदि किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही जांच में सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई हो।
  • जांच किसी भी दबाव या प्रभाव से मुक्त होकर की जाए और दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई हो।

मुस्कान अब इस दुनिया में नहीं है। उसके परिवार के पास सिर्फ उसकी यादें और कई अनुत्तरित सवाल हैं। ऐसे में इस मामले में सबसे जरूरी है कि मुस्कान की मौत के वास्तविक कारणों का सच सामने आए।

दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो और यदि जांच में किसी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए। कानून सबके लिए बराबर है।

मुस्कान के परिवार को बदले की नहीं, न्याय की जरूरत है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाना और दोषी पाए जाने वालों को कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा दिलाना ही इस मासूम के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

अब निगाहें पुलिस अधीक्षक कोरबा की कार्रवाई पर हैं। परिवार और महासंघ को उम्मीद है कि इस संवेदनशील मामले में जांच निष्पक्ष होगी, हर पहलू की पड़ताल की जाएगी और मुस्कान को न्याय दिलाने में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

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