रायगढ़

वेदांता और सार स्टील की जनसुनवाई मतलब कुनकुनी सहित दर्जनो गांवों को बंजर बनाने की तैयारी-टिकेश डनसेना

रायगढ़। वेदांता कोल एंड लॉजिस्टिक्स प्रदूषण का केंद्र कुनकुनी एन.एच. के किनारे जिले में सबसे बड़े आदिवासी जमीन घोटाले की जन्म स्थली कहे जाने वाले कुनकुनी में अब इन्ही आदिवासी जमीनों पर कोयले की राख उगने लगी है। खरसिया के इस कुनकुनी गांव से आदिवासियों को खदेड़कर अब यहां उद्योग बोये जा रहे हैं। यहां एक साथ दो उद्योगों की जनसुनवाई कराकर र्प्यावरण विभाग और उद्योग विभाग इस गांव के साथ दर्जनों गांवों को बंजर बना देना चाहता है।

वर्ष 2015 मे कुनकुनी जमीन घोटाले की संलिप्तता के आरोप में चार पटवारियों को कलेक्टर ने निलंबित किया था। जिसे जिले में 170 ख के तहत एक बड़ी कारवाई की शुरुआत मानी जा रही थी। लेकिन रसूखदारों ने अपनी पहुंच के दम पर इस घोटाले को ढंक दिया और अपने उद्योग लगाने के नाम पर सैकड़ों एकड़ आदिवासी जमीन की बेनामी खरीदी बिक्री कर ली। उस दौरान प्रशासन ने कुनकुनी गांव में 300 एकड़ आदिवासी जमीन की बेनामी खरीद बिक्री का मामला उजागर किया था। जिसमें एक नाम वेदांता कोल एण्ड लाजिस्टिक्स भी था, जिसने रेलवे साईडिंग के नाम पर आदिवासियों की जमीन की अफरातफरी की थी। अब उसी आदिवासी जमीन पर 7 वर्षो से उद्योग चला रही वेदांता को और जमीन की आवश्यकता है, ताकि वह अपने उद्योग को और बडा रुप दे सके। इसी तरह मेसर्स सार स्टील एण्ड प्राईवेट लिमिटेड नाम का एक और उद्योग कुनकुनी गांव में लगने जा रहा है। यह प्लांट इतना विशालकाय होगा कि पूरा गांव कोयले के कालिख में समा जाएगा, आस पास का जनजीवन पूर्ण रूप से प्रभावित होगा, पर्यावरण पूर्ण रूप से प्रदूषित हो जायेगा लोगो का जीना मुश्किल हो जायेगा। इस प्लांट में आयरनओर प्लांट, स्पंज आयरन प्लांट, रोलिंग मिल, कैप्टिव पावर प्लांट जैसे वृहद प्लांट लगाए जाऐंगे। इस नए उद्योग के लगने से केवल कुनकुनी गांव ही नहीं बल्कि पूरा क्षेत्र खैरपाली, पामगढ़, नवागढ़, बड़ेडूमरपाली, कुरु, रानीसागर, दर्रामुडा, चपले, रजघट्टा, बसनाझर जैसे गांव भी प्रत्यक्ष रुप से प्रदूषित और बर्बाद हो जाएगें। इस तरह आदिवासियों के इस गांव में अब पूरी तरह उद्योगपतियों का कब्जा हो जाएगा लोगो का जीना मुश्किल हो जायेगा।

लाइव भारत 36न्यूज से मनोज चौहान

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